Martial Arts, भारतीय मार्शल आर्ट्स का इतिहास प्राचीन काल से है, जिनका उपयोग युद्ध, आत्मरक्षा, शारीरिक दक्षता और धार्मिक अनुष्ठानों में होता रहा है। मार्शल आर्ट्स का शब्दार्थ है ‘युद्ध के मैदान से जुड़ी लड़ाई’।
Martial Arts – विविधता और सांस्कृतिक
मार्शल आर्ट्स का विकास भी भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग परंपराओं के अनुरूप हुआ, जिनमें युद्ध कौशल के साथ-साथ आध्यात्मिक और शारीरिक प्रशिक्षण की भी भूमिका रही। भारत की मार्शल आर्ट्स भी उतनी ही प्राचीन हैं जितनी नृत्य। ये कला न केवल युद्ध कौशल का माध्यम थीं, बल्कि आध्यात्मिक और शारीरिक विकास के साधन भी थीं। इनकी प्राचीनता का प्रमाण हड़प्पा सभ्यता से लेकर महाभारत तक मिलता है।
प्रत्येक आर्ट्स का अपना क्षेत्रीय, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है, जो भारत की विविधता को दर्शाता है।
प्रमुख भारतीय Martial Arts और उनके विशेषताएँ
| मार्शल आर्ट | क्षेत्र | मुख्य विशेषताएँ |
| मुष्टि युद्ध | वाराणसी | निहत्था मुकाबला, मार्शल कला की चार श्रेणियाँ, शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास। |
| इबुआन कुश्ती | मिजोरम | सख्त नियमों के साथ निहत्था कुश्ती, बेल्ट पकड़ना शामिल। |
| कूटू वररसइ | तमिलनाडु | निहत्था मार्शल आर्ट, योग और श्वास अभ्यास के साथ। |
| मिआपनी | महाराष्ट्र | हथियार आधारित युद्ध कला, तेजी और स्थिरता पर बल। |
| गतका | पंजाब | छड़ी, तलवार, कटार सहित हथियारों का उपयोग, धार्मिक और सांस्कृतिक समारोह। |
| परी-खण्डा | बिहार | Ç और ढाल का उपयोग, छऊ नृत्य में प्रभाव। |
| थोडा | हिमाचल प्रदेश | धनुष और तीर का उपयोग, वार्षिक उत्सव में प्रदर्शन। |
| चेबी गि-गा | मणिपुर | तलवार और ढाल से लड़ाई, प्रतिस्पर्धात्मक खेल, अंक |
| लस्सींबम | तमिलनाडु | बेंत से लड़ाई, वैज्ञानिक तकनीकें, पैर की गति और हाथों का समन्वय। |
| कलारीपयट्टू | केरल |
मार्शल आर्ट्स ने न केवल युद्ध कौशल विकसित किया बल्कि शारीरिक अनुशासन, आत्मरक्षा और मानसिक दृढ़ता को बढ़ावा दिया।आज भी ये कला रूप भारत के विभिन्न हिस्सों में जीवित हैं और विश्वभर में भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं। मार्शल आर्ट्स के प्रशिक्षण से शारीरिक फिटनेस, मानसिक संतुलन, और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा मिलता है। आज ये मार्शल आर्ट्स न केवल सांस्कृतिक धरोहर हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता प्राप्त कर चुके हैं। इनका संरक्षण, शिक्षा और प्रचार भारतीय सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
